कुतगेली – Garhwali Kavita

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Garhwali Kavita

Please read complete garhwali kavita

दगडयो नमस्कार  

मी एक कविता का माध्यम से कुतगेली लगाणू छौऊ .आशा करदू की आप ध्यान से पढिला कुतगेली 

पहाडा का भै बन्दो कख चलि ग्यो तुम,ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.?

बचपन की याद थै, ब्वै बाबो की डांट थै.

क्रिकेट की बात थै, गुरुजी की लात थै.

चौमासा का दिनो की ककडी कु स्वाद थै.

ग्वाइ लगायी जख किलै भूलि ग्यो तुम, ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.

गुल्लीडंडा, कंचा, पैसा, बटनों कु खेल थै.

लुका छिपी, जागर अर बराती का खेल थै.

लम्बी लैन लगाइक बनायी वीं रेल थै.

माछों की मछ्याण थै किलै भूलि ग्यो तुम, ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.

इस्कूला कू बस्ता थै, गौं गल्या कु रस्ता थै.

चौक डन्ड्याली तिबरी थै, गोर बकरा ढिबरी थै.

लखड़ौ का बूण थै, पाणी की पन्देरी थै .

करयां उल्टा कामों का दिन भूलि ग्यो तुम, ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.

बेडू तिमला भौटि थै, माल्टा नरंगी डालि थै

गेहूं का फुगड्यू मां, हिसोला की डालि थै.

नारंगी की चोरि मां, काकी बोडी गाली थै.

पक्या ग्यू की वीमी थै आज बिसरी ग्यो तुम, ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.

चौमासा की बरखा थै, सौण की कुहेडी थै.

हरच्या गोर बकरों थै,बांज बुरांश ठंगरी थै.

अखोड़ा की चोरी थै, पलि गंवा की छोरयूं थै.

लैला मजनू की कथा किलै बिसरी ग्यो तुम, ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.

गैथों की गथ्वाणी थै, भटौं की भट्वाणी थै.

घ्यू मन्डुवा की रोटी थै, मूला की थिच्वाणी थै.

झुंगरयलू कु जौलु अर, भटौं की गंज्याडी थै.

कन्डाली रायी चुआ की भुजी बिसरी ग्यो तुम, ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.

भैजी की बरात थै, दगड्यों का साथ थै.

सुलकणी बजायी की, करदा छा जै नाच थै.

मशकबाज रणसिगां, ढोल दमो थाप थै.

सनका बांदा गीत भी आज बिसरी ग्यो तुम, ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.

कतगा करिला प्यार तुम, शहर का उड्यार थै.

याद रख्यां भै बन्दो, गांव का गुठ्यार थै.

बचपना की याद थै, ब्वै बबों कु प्यार थै.

जौथै यखुली घार मां छोडि चलि ग्यो तुम ,ये पहाड थै किलै यखुली छोडि ग्यो तुम.

पैडि़की य कुतगेली याद आली गांव की,

कांफल बुरांश अर बांजा डालि छांव की.

कंठ भोरी उमाल थै आणी ना दिंया तुम, पहाड़ की याद मां रूणा ना रयां तुम.?

चलो घर बोडी वे जावा तुम⛰

धन्याबाद??

बिसिरी ना जया अपरू गो गुठ्यार थे||

 


Garhwali kavita hai re chinta :

हाय रे चिन्ता

जंगल फुकेणा पहाड़ मां,

अर चिन्ता होणी देहरादूण मां

पाणी सुकणू पहाड़ मां

अर डाली लगाणा देहरादूण माँ

नौकरी लगणी पहाड़ मां

अर ट्रांसफर करौणा देहरादूण मां

पैसा कमौंणा पहाड़ मां

अर कुड़ी बणौंणा देहरादूण मां

भूकंप औंणा पहाड़ मां

अर कंपण लग्यां देहरादूण मां

अ आ सिखणां पहाड़ मां

अर अग्रेजी बोना देहरादूण मां ।

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